19 minute 34 second video

19 minute 34 second video

19 minute 34 second video

  • 19 minute 34 second video
  • 19 minute viral video original link
  • 19 minute video viral video
  • 19 मिनट 34 सेकंड
  • video 19 minute viral video
  • 19 minutes viral video
  • 19 minute viral video download
  • 19 minute video
  • 19 minute viral video link
  • viral video 19 minute 34 seconds
  • 19 minute viral video original watch online
  • instagram viral girl boy video 19 minutes
  • 19 minute viral video original link

source सोशलिस्ट में आज मैं एक ढंग की बात करने जा रहा हूं। लेकिन मैं सेल्फ डाउट में हूं कि मुझे यह बात करनी चाहिए या नहीं क्योंकि मेरे आसपास लोग उसकी बात कर रहे हैं। बड़े कॉन्फिडेंस के साथ कर रहे हैं और यह जानते हुए कि वो गलत बातें कर रहे हैं लेकिन वह इस बारे में नहीं सोच रहे हैं। हम उस 19 मिनट 34 सेकंड के वीडियो की बात करेंगे जिसकी सोशल मीडिया पर आज हर तरफ चर्चा है। ज्यादा कहने समझने को है कुछ नहीं। एक कपल का अंतरंग वीडियो है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। तमाम साधनों से वायरल किया जा रहा है, कराया जा रहा है।  

उसके साथ तमाम बातें कही जा रही है कि लड़के ने धोखे से वायरल कराया। लड़की ने खुद क्या या कंटेंट के तौर पे बनाया। हवाई बातें हैं। तथ्य कुछ भी हो सकता है। यह एक अपराध हो सकता है। बहुत संवेदनशील मुद्दा हो सकता है। लेकिन फिलहाल बात यह नहीं है। बात है सोशल मीडिया पर जिस तरीके से लोग इस वीडियो पर टूटे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल उस वीडियो ने सोसाइटी की पोल खोली है।

वो दो लोगों के बीच का कोई पहला ऐसा वीडियो नहीं है जो वायरल हुआ हो और सोशल मीडिया पर उसको लेकर इतनी बातें चली हो। बातें प्रॉब्लमैटिक हैं। इसका ट्रेंड में बदल जाना प्रॉब्लमैटिक है। पहले आंखों की एक शर्म हुआ करती थी। ऐसा कोई भी एमएमएस नुमा वीडियो इसको लेके लोगों में दिलचस्पी, दुराग्रह, हिपोक्रेसी जितनी भी रही हो उनकी इतनी चर्चा नहीं हुआ करती थी। वो हर किसी की फीड पर ऐसे उपलब्ध नहीं होते थे।

19 minute 34 second video

खिल्ली उड़ाने का ऐसा भाव नहीं होता था। इस बार मामला अलग है। धड़ल्ले से दो लोगों की तस्वीरें और वीडियो शेयर करके उन पर कुछ भी कहा जा रहा है। ऐसा करने वाले खुद को नैतिक रूप से उनसे बेहतर मीमर डैंक सभी या सही समझ रहे हैं। बिना यह जाने समझे और परवाह किए कि एक यौन अपराध भी हो सकता है। ऐसे ट्रेंड्स की बात करने में हमेशा तुम्हारी फीड पे कैसे पहुंच गया? तुमको बड़ी दिलचस्पी है। तुम इसकी बात क्यों कर रहे हो? बढ़ावा क्यों दे रहे हो इसको? देश में कोई और खबर नहीं बची क्या?  तुमने भी देख लिया क्या वीडियो ऐसे कमेंट्स और आलोचनाएं आने का खतरा रहता है या ये बातें कही जाती हैं कि तुम भी तो इसको व्यूज के लिए कर रहे हो व्यूज के लिए बता रहे हो मुझको पता है पर वो जहर झेलना मूर्खताओं को जानना मेरा अभिशाप है और वरदान यह है कि ऐसी चीजों को मैं कॉल आउट कर सकूं और यह डॉक्यूमेंट कर सकूं के समय के इस अंश में सोशल मीडिया किस तरह के संक्रमण से गुजर रहा था।

Featured

खुद को फेक फेमिनिस्ट ऑफेंडर कहते हुए एक यूजर ने लड़कियों को बैश करना शुरू कर दिया। कमेंट्स में ऑटो सेंडर ऑन है। लाइक करो वीडियो मिल जाएगी। ऐसे कमेंट्स की भरमार थी। कुछ लोगों ने बकायदा वीडियो रिव्य्यू लिखना शुरू कर दिया। एक्स से लेकर Facebook तक यह खूब चला। कुछ ने इसको फेमिनिज्म को गरियाने और ट्रेड धारणा को पुष्ट करने का मौका बनाया। ईमानदारी से बात करेंगे। हमारे बुजुर्ग नियम बनाते थे। वो गलत नहीं थे। ऐसी बातें की गई। फिर आज के हालात को देख के सब कहा गया कि तमाशा बन गया है। लड़के लड़कियों का कंपैरिजन हुआ। 26 27 साल की उम्र में शादी के लिए लड़का तैयार होता है।

फिर उसको कैसी लड़की मिलती है। इस तरह की तमाम बातें डेट, उबर राइड, फ्री अटेंशन, फ्री तारीफ को भी निशाना बनाया गया और फिर सिंपिंग की बात की गई। कुछ ऐसे लोगों को गालियां दी गई और तमाम किस्म की बातें कही गई। एक लंबा पोस्ट था जिसमें हर तरह की बातें थी कि लड़कियां शादी खराब कर देती हैं। मर्दों को बिल भरना पड़ता है। तमाम तरह की और फिर उसके बाद वही फेमिनिस्ट क्वीन बन जाती हैं। कोर्ट केस में जिंदगी को घसीट देती हैं। गैस लाइटिंग ड्रामा खुद को पीड़ित दिखाने का खेल चलता है। फिर गरियाया गया फेमिनिज्म को कि फेमिनिज्म को बराबरी और सिमपिंग को दया कहा जाता है।

इस तरह की तमाम बातें सोशल मीडिया पर चल रही हैं। फिर वो तमाम बातें हैं कि लोग लिंक मांग रहे हैं। उस पर उस दोस्त से यह मांग रहा हूं जो यह काम कर सकता है। इस किस्म की मीम बनी और लिंक मांगने के चलन पर इंगेजमेंट फार्मिंग हुई। कुछ ऐसे घटिया किस्म के शेर भी लिखे जिनको मैं बोल भी नहीं सकता हूं। गाली गलौज के साथ वीडियो के इन 19 मिनट ड्यूरेशन की खूब बात हुई। बार-बार यह बात हो रही है। ये कीवर्ड बन गया है। मीम टेंपलेट की तरह इस्तेमाल हो रहा है। कई ऐसी बातें कही जा रही है कि हम नहीं कर सकते।

कुछ लोग लेकिन फिर भी सेम बातें करते हुए मिले कि चेतावनी जिम्मेदार इंसान बने। कई दिनों सोशल मीडिया पर एक प्राइवेट वीडियो की चर्चा हो रही है। लोग उसके लिंक मांग रहे हैं। सीधी सी बात है किसी की पर्सनल वीडियो मांगना, शेयर करना या वायरल करना अपराध है और उससे भी बड़ी बात यह इंसानियत के खिलाफ है। फिर बताया गया कि आईटी एक्ट के तहत ये साइबर क्राइम है। जेल और भारी जुर्माना हो सकता है कि किसी की भी निजी जिंदगी का तमाशा बनाना हमारी संस्कृति नहीं है।

वीडियो मांग के खुद को शर्मिंदा ना करें। 18 प्लस कंटेंट देखना है तो आप यहां वहां जाएं। तमाम किस्म की इज्जत और प्राइवेसी की बात कही गई। और साथ में यह चेताया गया कि आज किसी और की बारी है, कल आपकी भी हो सकती है। इसलिए रिस्पेक्ट प्राइवेसी बचाएं, ह्यूमन बने। रेडिट पर उस वीडियो के बारे में बहुत चर्चा चली कि कैसे उस वीडियो को देखकर लोगों को घृणा महसूस हुई और खुद पर बहुत शर्म आई। लोगों ने बड़े-बड़े पोस्ट लिख के बताया कि कैसे इस तरह का कंटेंट आने वाली पीढ़ियों को सेक्स के बारे में बहुत गलत बातें बता रहा है।

एक बीमार सोच की ओर धकेल रहा है। युवाओं के लिए कहा गया कि बिना सही एजुकेशन के वो यह सब सीख लेते हैं। फिर लड़के को अपराधी कहा गया। लड़की को मैनपुलेट करने वाला बताया गया कि कैसे वो जिसे प्यार समझ रही है शायद वो एक अपराध है। उन्होंने अपने हिसाब से उस वीडियो के बारे में कई बातें की। फिर कहा कि शेयर करना या लिंक मांगना बंद करें। ऐसे लोगों के खिलाफ आवाज उठाएं ताकि महिलाओं के शोषण को रोका जा सके। सोशल मीडिया पर अश्लील घिनौने इस किस्म के कंटेंट अक्सर वायरल होते हैं, हट जाते हैं। कई बार अपराधी पकड़े जाते हैं। आरोपियों को चुपचाप सजा भी मिलती है।

पेज भी डिलीट हो जाते हैं। वीडियोस डिलीट हो जाते हैं। ये सब एक इकोसिस्टम में पनप रहा है और अपनी मौत मर भी रहा है। हम हजार बार ऐसे मामले देखते हैं। उन पर रिएक्ट नहीं करते हैं या फिर रिपोर्ट करके आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन इस बार यह बहुत अलार्मिंग है कि यूथ ऐसे कंटेंट से इंटरेक्ट कर रहा है। एक संभावित अपराध को फैलाने में शामिल होने का भय उसमें नहीं है। बौद्धिक स्तर और सोच इतनी नीचे आ गिरी है कि हर तरह के कंटेंट की उपलब्धता उपलब्धता के बीच ऐसा वीडियो जो इग्नोर कर दिया जाना चाहिए था उससे लोग इस लेवल पे इंगेज हो रहे हैं ये

कुछ ऐसे चंद मीम पेजेस की बात नहीं है 100 200 पेजेस की बात नहीं है इस पे ऐसा इंटरेक्शन नहीं है कि कोई एक दो वीडियो मिलियंस में चल गया है लोग कुछ ही घंटों में लाखों करोड़ों की संख्या में उस वीडियो से इंटरेक्ट कर रहे हैं और नई पीढ़ी के लिए वह वाली बात तो है ही कि शर्म कर लो ऐसा घटियापन हर दौर में था एडल्ट साइड पे भरा पड़ा है लेकिन जैसा फूहड़पन जो बेशर्मी है और जिस तरीके से खुद इनवॉल्व होके आप अपने डिजिटल फुटप्रिंट छोड़ रहे हैं यह ले डूबेगा आपको और साथ में अगर यह किसी अपराध की ओर गया तब आपके साथ क्या हो सकता है आप ही सोच सकते हैं

ये है सोशल मीडिया। धन्य है सोशल मीडिया। आज के शो में इतना ही मिलते हैं कल तब तक के लिए चलते हैं टाटा।

If you want to earn through a website, make sure to read this

Leave a Comment

Bangladesh: खामोशी ही बनी ढाल, नाम बदलकर बची जान; भारतीय नागरिक की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी

बांग्लादेश में भड़की हिंसा के बीच फंसे भारतीय तबला वादक मैनाक बिस्वास ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि हालात इतने भयावह हो गए थे कि उन्हें अपनी जान बचाने के लिए न सिर्फ नाम बदलना पड़ा, बल्कि लंबे समय तक चुप्पी भी साधनी पड़ी। ढाका में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम स्थल पर हुए हमले के बाद हालात अचानक बिगड़ गए और वहां मौजूद कलाकारों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई।

मैनाक बिस्वास के मुताबिक, हिंसा के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था और बाहरी लोगों को लेकर शक बढ़ गया था। ऐसे में उन्होंने अपनी पहचान छुपाए रखी और खुद को स्थानीय बताने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि कई मौकों पर उनसे पूछताछ भी हुई, लेकिन उन्होंने संयम से काम लिया और किसी तरह खुद को सुरक्षित रखा।

उन्होंने आगे बताया कि हालात सामान्य होने का इंतजार करते हुए उन्हें कई दिन डर और अनिश्चितता के साए में बिताने पड़े। अंततः भारतीय दूतावास और स्थानीय लोगों की मदद से वह सुरक्षित तरीके से भारत लौटने में सफल रहे। मैनाक बिस्वास ने कहा कि यह अनुभव उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था, जिसे वह कभी नहीं भूल पाएंगे।

बांग्लादेश में फैली हिंसा के बीच भारतीय कलाकारों के लिए हालात किस कदर भयावह हो गए थे, इसकी रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर अब भारत लौटे एक युवा तबला वादक की आपबीती से सामने आई है। ढाका में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान अचानक बिगड़े हालात ने कलाकारों को असहाय और डरे हुए हालात में छोड़ दिया।

हिंसा भड़कने के बाद बाहरी लोगों को लेकर संदेह बढ़ गया, जिसके चलते भारतीय कलाकारों को अपनी पहचान छुपाने पर मजबूर होना पड़ा। जान बचाने के लिए न केवल नाम बदलना पड़ा, बल्कि लंबे समय तक चुप्पी साधकर रहना ही उनकी सबसे बड़ी सुरक्षा बन गई। हर कदम पर यह डर बना रहा कि कहीं पहचान उजागर न हो जाए।

आखिरकार कई दिनों की अनिश्चितता और भय के बाद कलाकार किसी तरह सुरक्षित भारत लौटने में सफल रहे। यह कहानी सिर्फ एक कलाकार की नहीं है, बल्कि उस डर, मजबूरी और संघर्ष की दास्तान है, जो हिंसा के माहौल में फंसे आम लोगों को हर पल झेलनी पड़ती है।

तबला वादक मैनाक बिस्वास ने बताया कि ढाका में हालात अचानक बेकाबू हो गए थे। जिन सरोद कलाकार के साथ वह बांग्लादेश पहुंचे थे, वे किसी तरह वहां से निकलने में सफल रहे, लेकिन बाकी कलाकारों की टीम हिंसा के बीच फंस गई। शहर में लगातार हो रहे प्रदर्शनों, तोड़फोड़ और भारत-विरोधी माहौल ने हालात को और भी डरावना बना दिया।

मैनाक के मुताबिक, सुरक्षा के डर से उन्हें करीब 48 घंटे तक होटल में छिपकर रहना पड़ा। इस दौरान बाहर निकलना जोखिम भरा था और हर कदम सोच-समझकर उठाना पड़ता था। जब मजबूरी में बाहर निकलना पड़ा, तो उन्होंने अपनी भारतीय पहचान छुपाई और स्थानीय नाम का सहारा लिया ताकि किसी को शक न हो।

उन्होंने बताया कि यह समय उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था, जहां हर पल जान का खतरा महसूस हो रहा था। सतर्कता और संयम के साथ किसी तरह हालात संभाले गए, जिसके बाद वे सुरक्षित भारत लौट सके।

कार्यक्रम रद्द, हिंसक भीड़ का कहर

ढाका के धनमंडी इलाके में स्थित एक सांस्कृतिक केंद्र में प्रस्तावित संगीत कार्यक्रम उस समय रद्द करना पड़ा, जब वहां हिंसक भीड़ ने हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से अफरा-तफरी मच गई और कलाकारों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो गया। हालात बिगड़ते देख कार्यक्रम को तत्काल रद्द कर दिया गया।

सरोद वादक शिराज़ अली खान किसी तरह सुरक्षित कोलकाता लौटने में सफल रहे, लेकिन उनकी मां समेत बाकी कलाकारों की टीम, जिसमें तबला वादक मैनाक बिस्वास भी शामिल थे, वहीं फंस गई। हमलावरों ने मंच पर रखे संगीत वाद्ययंत्रों को नुकसान पहुंचाया और परिसर में भारी तोड़फोड़ की।

घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया और कलाकारों को सुरक्षित स्थान पर शरण लेनी पड़ी। यह हमला न सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन पर था, बल्कि कलाकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े कर गया।

पहचान छुपाना बना जान बचाने का जरिया

मैनाक बिस्वास ने बताया कि हालात इतने नाजुक थे कि बाहर निकलते समय उन्होंने अपनी भारतीय पहचान जाहिर होने ही नहीं दी। टैक्सी बुक कराते वक्त उन्होंने अपना नाम बदल लिया और इस पूरे दौरान होटल कर्मचारियों की मदद ली। उनका कहना है कि ढाका की सड़कों पर भारत-विरोधी माहौल साफ तौर पर महसूस किया जा सकता था। उन्हें डर था कि अगर बातचीत के दौरान भाषा या लहजे से पहचान उजागर हो गई, तो स्थिति और भी खतरनाक हो सकती थी। ऐसे में चुप रहना ही उनकी सबसे बड़ी ढाल बन गया।

कैसे भड़की हिंसा?

बताया जा रहा है कि यह हिंसा इंकलाब मंच से जुड़े प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद भड़की। जुलाई 2024 में हुए आंदोलन से जुड़े इस नेता की मौत की खबर फैलते ही देश के कई हिस्सों में तनाव बढ़ गया। हालात इतने बिगड़ गए कि मीडिया संस्थानों और सांस्कृतिक केंद्रों को भी निशाना बनाया गया। बांग्लादेश की राजनीति में जारी अस्थिरता और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल से जुड़े विवादों ने माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया, जिससे हालात लगातार बिगड़ते चले गए।

एयरपोर्ट पहुंचते ही मिली राहत

टीम के बाकी सदस्य कई घंटों तक डर और अनिश्चितता के साए में एयरपोर्ट लाउंज में बैठे रहे। शहर की सड़कों पर लगातार हो रहे प्रदर्शनों और अचानक भीड़ जुटने की खबरों के बीच हर कदम बेहद सोच-समझकर उठाना पड़ा। मैनाक बिस्वास को अपने तबले की भी गहरी चिंता थी, क्योंकि उन्होंने हिंसा के दौरान संगीत वाद्ययंत्रों को तोड़े जाने की तस्वीरें देखी थीं, जिससे आशंका और बढ़ गई थी।

आखिरकार जब वे कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचे और अपना तबला सुरक्षित सलामत मिला, तब जाकर उन्हें सुकून का एहसास हुआ। उस पल उन्हें महसूस हुआ कि खतरे का दौर पीछे छूट चुका है।

कोलकाता लौटने के बाद मैनाक बिस्वास ने कहा कि वह जल्द ही एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन बांग्लादेश की वह भयावह यादें उन्हें लंबे समय तक परेशान करती रहेंगी। उन्होंने बताया कि भाषा और संस्कृति की समानता के बावजूद जो डर उन्होंने वहां महसूस किया, उसने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है। हालात पूरी तरह सामान्य होने तक वह दोबारा वहां जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

Leave a Comment

Loading more posts...

Special for you

Share:

Facebook
Twitter
LinkedIn
Reddit
Pinterest
VK
OK
Tumblr
Digg
Skype
StumbleUpon
Mix
Telegram
Pocket
XING
WhatsApp
Email
Print
X
Threads